पिता जीवन को आधार देते हैं।


पिता जीवन के संबल

पिता वह तरुवर हैं जो जीवन को छाँव देते हैं,जिनकी उपस्थिति से जीवन के चहुँओर एक ढाल का अनुभव होता है।
Pita jeevan ko aadhar dete hain




पिता जब तक रहते हैं व्यक्ति अपने को एक बालक की भाँति ही समझने लगता है, किसी के ये कहने पर की ये बच्चों वाले स्वभाव का त्याग करो व्यक्ति क्रोधित इसलिए हो जाता है क्योंकि पिता के सान्निध्य में उसके जीवन को संबल प्राप्त होता रहता है।


जीवन रसरी अधिक छोटी नहीं
पिता के रहते ये कहने पर भी संभवतः इसलिए वह समझ नहीं पाता है कि अब बालपन का त्याग कर बड़े हो क्योंकि उसे लगता है कि अभी जीवन रसरी बहुत अधिक छोटी नहीं है इसलिए यह अभी टूटेगी नहीं।


जीवन को सुनियोजित गति देना


पर उस परमात्मा के यहाँ सबकी जीवन रसरी की नाप-तौल सुनिश्चित है,निर्धारित है।अतः मनुष्य कितना भी कहले,बहाने बना ले कि जीवन रसरी मेरी अभी बहुत बड़ी है ये बहाने उसके व्यर्थ ही होंगे।
अतएव सभी मनुष्यों को चाहिए कि वह अपनी जीवन यात्रा को एक सुनियोजित गति देने के लिए ससमय तैयार हो जाए।


पिता के रहते व्यक्ति बालक

पिता क्या हैं और उनके इस संसार से परमधाम जाने के बाद व्यक्ति को कैसी अनुभूति होती है । 
            

टिप्पणियाँ

  1. बहुत ही अच्छी रचना👌👌👌👌👌
    यह बात बिल्कुल १००% प्रतिशत सत्य है कि पिता ही जीवन को आधार देते हैं।🙏🙏

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  2. अत्यंत ही गूढ़ रचना👌
    मानव जीवन एक संचित उर्जा है जो कि अल्पकालिक स्थिरता लिए हुए है, लेकिन किसी भी उर्जा का वास्तविक स्वभाव ही अस्थिर होता है। मृत्यु उस संचित उर्जा को ऊस अस्थिर ब्रह्मांड में मुक्त कर देती है।

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    उत्तर
    1. यथार्थ कहा आपने जीवन चक्र अर्थात् सृष्टि चक्र इसी सिद्धांत पर कार्य करती है कि यः जीवितुं सः मरिष्यति अपि।
      जो जीवित है,वह अवश्य ही मृत्यु को प्राप्त होगा,इस प्रकार समष्टि में सन्तुलन बना रहेगा।
      परन्तु फिर भी यह मानव मन अपने परिजन वियोग को सह नहीं पाता🙏🌹🙏

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  3. पिताश्री को समर्पित सच्ची श्रद्धांजलि

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    1. जी हृदय तल से आभार,बस प्रयत्न मात्र है।
      पिता के बारे में लिखना इतना अधिक सरल नहीं।

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  4. बहुत सुंदर 👌 आपने पिता का मनुष्य के जीवन एवं व्यक्तित्व निर्माण में क्या स्थान है, बहुत सुंदर शब्दों में व्याख्या की है।

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  5. जी आदरणीया,सादर आभार।
    पिता वह ब्रह्माण्ड हैं जिनके बारे में कुछ लिख पाना संभव नहीं।

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  6. बहुत ही हृदय स्पर्शी रचना दिल को छू गयी बिल्कुल सत्य है पिता के बिना जीवन का कोई आधार नहीं 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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