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Search of life । प्रसिद्धि: रिश्ते की 'प्राणवायु' [Formula: (प्रसिद्धि)^सामान्य जीव = रिश्तों का सैलाब]

प्राणवायु बनाम ऑक्सीजन: एक सामाजिक विरोधाभास मनुष्य एक अद्भुत जीव है, जो सांसें भले ही ऑक्सीजन से लेता हो, लेकिन जीता सिर्फ 'प्रसिद्धि' के सहारे है। उसे दिन-रात बस इसी बात का भय सताता रहता है कि कहीं उसके 'मान-सम्मान' को ज़रा सी खरोंच न आ जाए। जब तक आप एक साधारण और सामान्य इंसान हैं, यह संसार आपकी बातें सुनना तो दूर, आपकी ओर देखना तक अपनी तौहीन समझता है—चाहे आप समाज की भलाई में अपना सब कुछ ही क्यों न होम कर दें। ​जब तक आपके नाम के आगे कोई 'चमकता हुआ तमगा' नहीं है, तब तक आपके अपने निकटतम मित्र, भाई-बंधु और रिश्ते-नातेदार आपको रोज़ यह अहसास कराने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे कि इस धरती पर आपका जन्म शायद केवल वायुमंडल की ऑक्सीजन कम करने के लिए ही हुआ है! ​(प्रसिद्धि)^सामान्य जीव = रिश्तों का सैलाब | Search of life सामाजिक समीकरण‌ 1.0 ​ (सामान्य जीव) × (शून्य प्रसिद्धि) = पूर्ण उपेक्षा यहाँ तक कि जब आप किसी पारिवारिक समारोह में प्रवेश करते हैं, तो आपकी स्थिति उस 'मूक दर्शक' जैसी होती है, जिसे देखकर लोग बस यही सोचते हैं—"यह क्यों आया है?" ​लेकिन समाज क...