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Raaz:-kuchh unsuljhe kuchh unkahe rahasya




Raaz

Raaz एक शब्द जो शब्दमात्र नहीं, अत्यन्त व्यापक है।

Raaz लोग अपने Raaz छुपाकर इस जगत में अपनी नयी पहचान बनाते हैं।
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Raaz

Raaz

Aasmaan pe shaan se

कुछ लोग तो अपने जख़्म के Raaz छुपाकर लोगों के जख़्म की मरहम पट्टी में लगे रहते हैं।

Kuchh unsuljhe kuchh unkahe rahasya
ये राज़ कभी kuchh unsuljhe kuchh unkahe rahasya की तरह ही होते हैं जो कभी समझ में आते हैं,तो कभी समझ में भी नहीं आते।
इन्हें kuchh unsuljhe kuchh unkahe rahasya हम इसलिए कह सकते हैं क्योंकि इन्हें सुलझाने के प्रयत्न करना अपने आप में एक बहुत बड़ी योग्यता है क्योंकि मनोनुकूल भावों के प्रतिफल स्वरूप ही इन सभी राज़ की व्युत्पत्ति होती है।
सत्य कहा जाय तो यही मानव धर्म है अपने राज़ को छुपाकर ही सच्चा राज़दार बनकर लोगों की सहायता की जा सकती है।
इस संपूर्ण विश्व में लोग अनगिनत राज़ छुपाए रहते हैं,कुछ जख्म तो कुछ स्मृतियाँ तो कभी-कभी अनायास ही लोगों को यहाँ राज़ छुपाना अच्छा लगता है,इसे वो किसी से भी साझा कर राज़दार बनाना नहीं चाहते हैं।
प्रत्येक राज की अपनी ही एक कहानी है, kuchh unsuljhe kuchh unkahe rahasya बनकर रह जाते हैं,ऐसा करने के पीछे कुछ लोगों का मानना है कि ,"जब वो अपना राज़ किसी से यदि साझा कर राज़दार बनाते हैं,तो लोग उनका मजाक उड़ाएंगे,उपहास करेंगे,इसलिए वो राज़ को राज बनाए रखना ही उचित मानते हैं।

निष्कर्ष:- इसे मैंने भी अपने बुद्धि -विवेक से समझने का प्रयत्न किया है और मुझे भी लगा कि कुछ Raaz परिस्थिति अनुकूल ही छुपाए जाते हैं और कुछ प्रकट किए जाते हैं।उदाहरण के लिए मरीज से उसकी वास्तविक बीमारी को इसलिए छिपाया जाता है क्योंकि उससे वह शीघ्र स्वास्थ्य लाभ कर सकता है और यदि इन राज़ों को उसके समक्ष प्रकट कर दिया जाएगा ,तो संभवतः वो और अधिक अस्वस्थ हो जाय।
ऐसी मान्यता है या कुछ और ये कह पाना तो संभव नहीं,पर ये kuchh unsuljhe unkahe rahasya ही हैं।
राज छुपाने के निम्नलिखित लाभ व हानि हैं:-
छुपे राज़ कभी-कभी प्राणरक्षक प्रमाणित होते हैं।
राज़ छुपाने से राज प्रकट करने से होने वाली पीड़ा से बचा जा सकता है।
राज़ जख्म की तस्वीर बयाँ करने में सक्षम हैं।
राज़ छुपाने से व्यक्ति विशेष को समझने में सहायता मिलती है।

आवश्यक प्रश्न व उत्तर:-
१.मुक्तक क्या ?
यह एक मुक्त छंद तो है पर यह विधान आधारित है ।
सीमित शब्दों में लेखन के माध्यम से अपनी बात कहने का यह एक अचूक उपाय है।
२.मुक्तक क्या किसी छंद पर आधारित होता है?
हाँ!यहकिसी न किसी छंद पर आधारित ही प्रायः होता है।
३.मुक्तक के लिए क्या मात्राभार निर्धारित है?
जी इसे समान मात्राभार में ही लिखने का विधान है।
४.मुक्तक लेखन के लिए पंक्तियों का निर्धारण किस प्रकार किया जाता है?
मुक्तक लेखन के लिए पंक्तियों को इस प्रकार रखा जाता है जिससे कि पहली, दूसरी व चौथी पंक्ति तुकांत तथा तीसरी अतुकांत ही हो।
५.मुक्तक छंद क्या होते हैं ?
उत्तर-मुक्तक काव्य की वह विधा है जो मुक्त होती है अर्थात यह गागर में सागर भरने का काम करती है।
इस विधान के अन्तर्गत लिखे गये प्रत्येक छंद अपने आप में ही पूर्ण सक्षम होते हैं स्पष्ट अर्थ प्रकट करने के लिए।
६. मुक्तक काव्य के दो प्रकार प्रचलित हैं,नाम व परिभाषा दें।
उत्तर- मुक्तक काव्य के दो प्रचलित प्रकार हैं:-गेय मुक्तक व पाठ्य मुक्तक
गेय मुक्तक- मुक्तक का वह प्रकार जिसे लिखकर गाया जा सके अर्थात् सुर,ताल व लय में प्रस्तुत किया जा सके।
गेय मुक्तक के उदाहरणों में दोहा मुक्तक,विधाता छंद आधारित मुक्तक इत्यादि हैं।
पाठ्य मुक्तक- पाठ्य मुक्तक से हमारा आशय मनोनुकूल,मनोभावों पर आधारित विचारधाराओं के प्रस्तुतीकरण से माना जा सकता है।




हज़ारों लोग हैं दिखते,छुपा हर राज़ जो रखते,
भरा है दर्द सीने में,मगर नासाज़ ना दिखते।
विफल होकर,सभी सीखें,सफल कैसे,हमें होना-
चमकते जो,सदा पत्थर,करोड़ों दाम में बिकते।१


दफ़न कर दर्द अपने तू,ज़मीं में राज़ तुम वैसे।
शमा जलके,करे रोशन,जहाँ को ,सदा वैसे।
तबीयत से,सुनो पत्थर,यहाँ थोड़ा,उछालो तुम-
अभी जाना,हमें मीलों,फत़ह के राज़ फिर लिखते।२
भारत भूषण पाठक'देवांश'🙏🌹🙏

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